जीवन कौशल

बेहतर भविष्य के लिए

Life Skills for

Realising Growth

Life Skills for

Informed Decision Making

Life Skills for

Better Health & Well Being

Life Skills for

Addressing Harmful Social Practices

जीवन कौशल शिक्षा (एलएसई)

जीवन कौशल शिक्षा सीखने-सिखाने की ऐसी प्रक्रिया है जो शिक्षार्थियों को जानकारी प्राप्त करने, उचित दृष्टिकोण विकसित करने और विभिन्न कौशल विकसित करने में सहायक है व उन्हें निर्णय लेने और सकारात्मक व्यवहार की दिशा में प्रेरित कर उनके सर्वांगीण विकास में योगदान करती है ।

क्रियान्वयन की रणनीति

पद्धति (एप्रोच)

जीवन कौशल शिक्षा सत्र वयस्क और अनुभवात्मक सीख के सिद्धांतों पर आधारित हैं

सहभागी प्रशिक्षण तकनीक

विद्यार्थियों में जीवन कौशल विकसित करने हेतु उपयोग में लाई जाने वाली सहभागी प्रशिक्षण तकनीक

रोल प्ले
परिस्थिति कार्ड
कहानी
खेल
केस-स्टडी
मति-मंथन
वाद-विवाद/ क्विज़
समूह चर्चा

दस जीवन कौशल

सामाजिक कौशल
स्वजागरूकता
स्वयं के गुणों, विशेषताओं को जानना, अपने आप को पहचानना, अपने जीवन के मूल्य, पसंद तथा नापसंद और अपनी शक्तियों तथा कमजोरियों को पहचानना ही स्वजागरूकता है।
संवाद कौशल
बातचीत को प्रभावी/बेहतर बनाना, स्वयं को मौखिक व अमौखिक संवाद द्वारा सही ढंग से व्यक्त करने एवं ध्यानपूर्वक सुनने की दक्षता संवाद कौशल है। इसका अर्थ है अपनी इच्छाओं/भावनाओं या विचारों को व्यक्त कर पाना एवं दूसरों की बातों को अच्छे से सुनना।
अंतर्वैयक्तिक संबंध
यह वो दक्षता है जो हमें दूसरों से हमारे सम्बन्धों को समझने और उन्हे सकारात्मक तरीके से जोड़ने में मदद करती है तथा अस्वस्थ (विवादित) रिश्तों से रचनात्मक तरीके से बाहर निकलने में मदद करती है।
समानुभूति
दूसरों की स्थिति में स्वयं को रख कर देखना समानुभूति है। किसी भी व्यक्ति की किसी विशेष परिस्थिती में स्वयं को रख कर कल्पना करने, उसे समझने, स्वीकार करने और आवश्यकतानुसार मदद करने की दक्षता समानुभूति है। इसमें दूसरों के आत्मसम्मान का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है।
विश्लेषणात्मक कौशल
समालोचनात्मक चिंतन
यह अनुभवों के आधार पर अपने सोचने व व्यवहार करने की दक्षता है। यह जानकारी/सूचना और अनुभव के आधार पर किसी भी कार्य के बारे में सकारात्मक व नकारात्मक दोनों पहलुओं के विश्लेषण करने की दक्षता है।
रचनात्मक चिंतन
किसी भी कार्य के प्रति नवीन सोच रखना या उसके बारे में अलग ढंग से सोचना रचनात्मक चिंतन है। यह ऐसी दक्षता है जो हमें अपने अनुभवों से ऊपर उठ कर देखने और विभिन्न मुद्दों का अलग नज़रिये से विश्लेषण करने में मदद करती है। यह हमारे दैनिक जीवन की परिस्थिति में नवीनता एवं लचीलापन लाती है। यह विभिन्न विकल्पों को ढूँढने, समस्या समाधान में और निर्णय लेने में सहायक है।
निर्णय लेना
परिस्थियों के अनुसार सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार करना, उनके प्रभावों को दृष्टिगत रखते हुए किसी एक को चुनने की प्रक्रिया निर्णय लेना कहलाती है।
समस्या समाधान
समस्या का सामना करते समय विभिन्न विकल्पों के बारे में सोचकर उनका विश्लेषण कर पाना एवं उचित विकल्प को चुन कर समस्या को सकारात्मक तरीके से हल करने के कौशल को समस्या समाधान कहते हैं। यह विषम परिस्थितियों में सही विकल्प के चुनाव की दक्षता है।
भावनात्मक कौशल
तनाव का सामना
यह हमारे जीवन में तनाव के स्त्रोत की पहचान करने तथा उनका हम पर प्रभाव जानने की दक्षता है, जिससे तनाव का प्रबंधन हो सके। इसमें तनाव कम करने की प्रक्रिया शामिल है जैसे बाहरी पर्यावरण में बदलाव, तनाव से दूर रहने के तरीके सीखना आदि।
भावनाओं का प्रबंधन
यह अपनी तथा दूसरों की भावनाओं को पहचानने, हमारे व्यवहार पर भावनाओं के विपरीत प्रभाव से सचेत रहने, भावनाओं को सही ढंग से प्रतिपादित करने तथा भावनाओं का प्रबंधन करने की दक्षता है।

हमारी पहल

कार्यक्रम की पहुँच
उमंग

जिले

विद्यालय

प्रशिक्षित शिक्षक

+
विद्यार्थी
जीवन तरंग

जिले

आईटीआई

प्रशिक्षित अधिकारी

+
विद्यार्थी

प्रतिक्रियाएँ

मैं मुश्किल दौर से गुजर रही थी। स्वास्थ्य संबंधी मेरी कई समस्याएं थीं, लेकिन मैं इनके बारे में बात करने में झिझक रही थी और मुझे कोई मार्गदर्शन भी नहीं मिल रहा था। फिर मैंने उमंग कक्षाओं में भाग लिया। इसने मेरी अधिकांश शंकाओं का समाधान कर दिया। उमंग को धन्यवाद।

अंकिता चक्रवर्ती

परिवार से जुड़े कुछ मुद्दों के कारण मैं बहुत तनाव में थी। मेरी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही थी। तब उमंग सेशन ने मुझे तनाव से निपटने का रास्ता दिखाया। धीरे-धीरे मैं अपने जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाकर इस स्थिति से बाहर आने में सक्षम हुई। मैं उमंग कार्यक्रम और हमारे शिक्षकों की बहुत आभारी हूं।

आरती प्रजापत

मैं तंबाकू चबाने का शिकार हो गया था और मैं इस बुरी आदत को छोड़ना चाहता था। उमंग कक्षा सत्र के दौरान हासिल की गई जीवन कौशल - विशेष रूप से ‘मादक पदार्थों के सेवन’पर सत्र से, मुझे इस लत से बाहर निकलने में मदद मिली। मैं अब बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं।

समीर मरकाम

मुझ पर परिवार का बहुत दबाव था और मुझे डर था कि जल्दी विवाह की परंपरा के कारण मुझे पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है। लेकिन उमंग कार्यक्रम को धन्यवाद, जिसने मुझे अपने माता-पिता से बात करने और समझाने का साहस दिया और मैं स्कूल में वापस आ गई।

दीक्षा

हमारे सहयोगी