जीवन कौशल

जीवन कौशल वे अनुकूल और सकारात्मक व्यवहार की क्षमताएं हैं जो व्यक्ति को रोजमर्रा की जिंदगी की आवश्यकताओं और चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने में सक्षम बनाती हैं। – डबल्यू एच ओ

समालोचनात्मक चिंतन

यह अनुभवों के आधार पर अपने सोचने व व्यवहार करने की दक्षता है। यह जानकारी/सूचना और अनुभव के आधार पर किसी भी कार्य के बारे में सकारात्मक व नकारात्मक दोनों पहलुओं के विश्लेषण करने की दक्षता है।

रचनात्मक चिंतन

किसी भी कार्य के प्रति नवीन सोच रखना या उसके बारे में अलग ढंग से सोचना रचनात्मक चिंतन है। यह ऐसी दक्षता है जो हमें अपने अनुभवों से ऊपर उठ कर देखने और विभिन्न मुद्दों का अलग नज़रिये से विश्लेषण करने में मदद करती है। यह हमारे दैनिक जीवन की परिस्थिति में नवीनता एवं लचीलापन लाती है। यह विभिन्न विकल्पों को ढूँढने, समस्या समाधान में और निर्णय लेने में सहायक है।

निर्णय लेना

परिस्थियों के अनुसार सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार करना, उनके प्रभावों को दृष्टिगत रखते हुए किसी एक को चुनने की प्रक्रिया निर्णय लेना कहलाती है।

समस्या समाधान

समस्या का सामना करते समय विभिन्न विकल्पों के बारे में सोचकर उनका विश्लेषण कर पाना एवं उचित विकल्प को चुन कर समस्या को सकारात्मक तरीके से हल करने के कौशल को समस्या समाधान कहते हैं। यह विषम परिस्थितियों में सही विकल्प के चुनाव की दक्षता है।

स्वजागरुकता

स्वयं के गुणों, विशेषताओं को जानना, अपने आप को पहचानना, अपने जीवन के मूल्य, पसंद तथा नापसंद और अपनी शक्तियों तथा कमजोरियों को पहचानना ही स्वजागरूकता है।

संवाद कौशल

बातचीत को प्रभावी/बेहतर बनाना, स्वयं को मौखिक व अमौखिक संवाद द्वारा सही ढंग से व्यक्त करने एवं ध्यानपूर्वक सुनने की दक्षता संवाद कौशल है। इसका अर्थ है अपनी इच्छाओं/भावनाओं या विचारों को व्यक्त कर पाना एवं दूसरों की बातों को अच्छे से सुनना।

अंतर्वैयक्तिक संबंध

यह वो दक्षता है जो हमें दूसरों से हमारे सम्बन्धों को समजहने और उन्हे सकारात्मक तरीके से जोड़ने में मदद करती है तथा अस्वस्थ (विवादित) रिश्तों से रचनात्मक तरीके से बाहर निकलने में मदद करती है।

समानुभूति

दूसरों की स्थिति में स्वयं को रख कर देखना समानुभूति है। किसी भी व्यक्ति की किसी विशेष परिस्थिती में स्वयं को रख कर कल्पना करने, उसे समझने, स्वीकार करने और आवश्यकतानुसार मदद करने की दक्षता समानुभूति है। इसमें दूसरों के आत्मसम्मान का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है।

तनाव का सामना

यह हमारे जीवन में तनाव के स्त्रोत की पहचान करने तथा उनका हम पर प्रभाव जानने की दक्षता है, जिससे तनाव का प्रबंधन हो सके। इसमें तनाव कम करने की प्रक्रिया शामिल है जैसे बाहरी पर्यावरण में बदलाव, तनाव से दूर रहने के तरीके सीखना आदि।

भावनाओं का प्रबंधन

यह अपनी तथा दूसरों की भावनाओं को पहचानने, हमारे व्यवहार पर भावनाओं के विपरीत प्रभाव से सचेत रहने, भावनाओं को सही ढंग से प्रतिपादित करने तथा भावनाओं का प्रबंधन करने की दक्षता है।